टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाने वालों को शर्म नहीं आई? चंद रुपयों के लिए जान से खेल गए
पूछताछ में आरोपियों ने माना कि उन्हें गोलीबारी के बदले 35 हजार रुपये मिलने वाले थे, और विदेश भेजने का लालच भी दिया गया था।
- तीन आरोपी कोटा से पकड़े गए, सोमवार को कोर्ट में पेशी हुई
- गोलीबारी के बदले 35 हजार रुपये देने का वादा था
- नेपाल भागने से पहले जयपुर पहुंचते ही पुलिस ने दबोचा
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस घटना ने मुंबई में फिल्मी सितारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान के कोटा में तीन संदिग्धों को पकड़ने के बाद पुलिस को शुरुआती पूछताछ में पैसे और विदेश भेजने के लालच से जुड़ी अहम जानकारी मिली है। हालांकि, मामले में सामने आए दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
इस केस में ताजा अपडेट यह है कि कोटा की अदालत से 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद मुंबई पुलिस तीनों आरोपियों को लेकर रवाना हुई थी। लेकिन रास्ते में कुछ लोगों द्वारा पीछा किए जाने का शक होने पर पुलिस टीम पहले एक थाने में रुकी और फिर वापस कोटा लौट आई। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों को दोबारा मुंबई ले जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है।
35 हजार रुपये और विदेश भेजने का लालच देने की बात
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में फायरिंग की वारदात के बदले 35 हजार रुपये देने का लालच दिए जाने की बात सामने आई है। आरोपियों को विदेश भेजने का प्रस्ताव दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। बताया जा रहा है कि रकम वारदात पूरी होने के बाद दी जानी थी, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने संदिग्धों को पकड़ लिया।
जांच में अनिल पंडित और रेहान के कथित संपर्क की बात भी सामने आई है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि घटना की योजना किसने बनाई, आरोपियों को निर्देश किसने दिए और पैसे देने का वादा किस स्तर पर किया गया था। इन कड़ियों को जोड़ने के लिए पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। फिलहाल इन दावों को जांच के शुरुआती निष्कर्ष के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
मुंबई से सूरत और फिर कोटा तक कैसे पहुंचे आरोपी?
पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी। घटना के समय अभिनेता फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे। टाइगर को चोट नहीं आई, जबकि उनके ड्राइवर के घायल होने की खबर सामने आई थी। वारदात के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए और पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी।
जांच से जुड़े मीडिया विवरणों के अनुसार, आरोपी मुंबई से निकलकर सूरत पहुंचे और वहां से ट्रेन के जरिए आगे की यात्रा की। सूरत रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की मदद से उनकी आवाजाही की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद मुंबई पुलिस, राजस्थान पुलिस और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की संयुक्त कार्रवाई में तीनों को कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़ लिया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की योजना पहले जयपुर और फिर दिल्ली होते हुए नेपाल जाने की थी। हालांकि, वे अपने कथित ठिकाने तक पहुंच पाते, उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यात्रा के दौरान बिना टिकट सफर करने और जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।
हथियार बरामद हुए या नहीं?
इस मामले में जांच का एक अहम पहलू फायरिंग में इस्तेमाल हथियारों का पता लगाना है। शुरुआती पुलिस जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास से हथियार बरामद नहीं हुए थे। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कहां हैं और घटना के बाद उन्हें कहीं छिपाया या फेंका गया था या नहीं।
पुलिस गैंगस्टर अनिल पंडित की कथित भूमिका और अन्य संभावित संपर्कों की भी जांच कर रही है। इस स्तर पर किसी व्यक्ति या गिरोह की भूमिका को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। जांच एजेंसियां डिजिटल संपर्क, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि कर रही हैं।

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