ये किस्सा सुन के रोंगटे खड़े हो जाएं भैया, प्यार-मोहब्बत से लेकर नदी तक की पूरी कहानी
बिहार की स्नेहलता पांडेय की हत्या के आरोप में भिंड का सत्यप्रकाश जाटव सवालों के घेरे में है, पुलिस पचनदा नदी में शव की तलाश कर रही है
jansampark time ,जिस महिला ने नर्सिंग ऑफिसर बनने का सपना देखा, पढ़ाई के लिए बिहार से मध्य प्रदेश के भिंड पहुंचीं और अपना परिवार बसाने की उम्मीद की, आज उनका परिवार उनकी आखिरी झलक पाने के लिए परेशान है। बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली स्नेहलता पांडेय 8 अक्टूबर 2026 से लापता थीं। मामले की जांच आगे बढ़ी तो उनके लिव-इन पार्टनर सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव पर उनकी हत्या करने और शव उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में पचनदा नदी में फेंकने का आरोप सामने आया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर हत्या की बात स्वीकार की है। हालांकि, स्नेहलता का शव बरामद नहीं होने के कारण मामले की जांच अब भी अहम मोड़ पर है।
पढ़ाई के दौरान हुई मुलाकात, फिर साथ रहने लगे दोनों
स्नेहलता मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली थीं। करीब तीन साल पहले वह जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM) का कोर्स करने भिंड आई थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात जोशी नगर निवासी सत्यप्रकाश जाटव से हुई, जो उसी कॉलेज में काम करता था। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे साथ रहने लगे। दोनों का एक 11 महीने का बेटा भी है।
मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली पत्नी से कोई बच्चा नहीं था। आरोप है कि उसने अपनी पहली शादी की बात स्नेहलता से छिपाई थी और बच्चा होने की इच्छा के चलते उनके साथ संबंध बनाए। हालांकि, रिश्ते की शुरुआत में दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी और आरोपी की मंशा क्या थी, इसकी पूरी पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।
बच्चे के जन्म के बाद बढ़ने लगा विवाद
पुलिस जांच से जुड़ी खबरों के मुताबिक, स्नेहलता और सत्यप्रकाश के रिश्ते में समय के साथ तनाव बढ़ने लगा था। दोनों के पारिवारिक हालात और सत्यप्रकाश की पहली शादी को लेकर भी विवाद होने की बात सामने आई है। बताया गया कि स्नेहलता अपने बच्चे के साथ सत्यप्रकाश के पास रहना चाहती थीं, जबकि उनके बीच साथ रहने और भविष्य को लेकर मतभेद थे। इन विवादों का हत्या से क्या संबंध था, इसकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों और अन्य सबूतों से होनी बाकी है।
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल यही है कि आखिर 11 महीने के बच्चे की मां स्नेहलता अचानक कहां गायब हो गईं और उनके साथ आखिरी बार क्या हुआ था। परिवार के लिए यह सिर्फ गुमशुदगी का मामला नहीं, बल्कि अपनी बेटी की सुरक्षा और उसके अंतिम संस्कार से जुड़ा दर्दनाक इंतजार बन गया है।
8 अक्टूबर को कानपुर जाने की बात, फिर नहीं लौटीं स्नेहलता
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 8 अक्टूबर को सत्यप्रकाश स्नेहलता को कानपुर ले जाने की बात कहकर निकला था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि इस यात्रा के दौरान एक एंबुलेंस चालक और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, स्नेहलता के लापता होने के बाद घटनाक्रम और उपलब्ध सुरागों को जोड़कर पूछताछ की गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि स्नेहलता की हत्या करने के बाद उनका शव पचनदा नदी में फेंक दिया गया। पचनदा उत्तर प्रदेश के इटावा क्षेत्र में पांच नदियों के संगम वाला इलाका है। शव को नदी में फेंके जाने के दावे के बाद पुलिस और बचाव दल ने वहां तलाश शुरू की। इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी के बयान के साथ-साथ दूसरे साक्ष्यों का सत्यापन भी जरूरी है।
मगरमच्छों वाले नदी क्षेत्र में तलाश, अब तक नहीं मिला शव
पचनदा नदी क्षेत्र में मगरमच्छों की मौजूदगी के कारण तलाशी अभियान चुनौतीपूर्ण बताया गया है। पुलिस और बचाव दल नदी में स्नेहलता की तलाश कर रहे हैं। 19 अक्टूबर तक प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उनका शव बरामद नहीं हुआ था। जांच के दौरान नदी के आसपास के इलाके में तलाशी और घटनाक्रम से जुड़े सुरागों की पड़ताल की जा रही थी।
शव का नहीं मिलना जांच के लिए बड़ी चुनौती है। इससे परिवार को भी अपनी बेटी के साथ आखिरी बार क्या हुआ, इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है। पुलिस के सामने अब कथित वारदात की पूरी कड़ी स्थापित करने, संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने और उपलब्ध सबूतों के आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है।
परिवार को न्याय और बेटी के शव का इंतजार
स्नेहलता के परिवार ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी बेटी का शव अब तक नहीं मिला है। ऐसे मामलों में आरोपी के कथित बयान के साथ घटनास्थल से मिले सबूत, तकनीकी जानकारी, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का मिलान महत्वपूर्ण होता है।
फिलहाल इस मामले में सबसे जरूरी सवालों के जवाब सामने आना बाकी है: स्नेहलता की मौत किन परिस्थितियों में हुई, क्या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी और उनका शव कहां है? पुलिस की जांच और तलाशी अभियान से ही इन सवालों पर स्पष्टता आने की उम्मीद है। जब तक जांच पूरी नहीं होती और अदालत में आरोप साबित नहीं होते, तब तक आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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