जबलपुर लोकायुक्त की कार्रवाई: 3 हजार की रिश्वत लेते वनपाल सुनील बनवारी गिरफ्तार, पंजीयन रद्द करने की दी थी धमकी
शिकायत के मुताबिक, लकड़ी कारोबार से जुड़ी त्रैमासिक जानकारी पर हस्ताक्षर करने के बदले रकम मांगी गई थी। जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने 13 अक्टूबर को बिछुआ स्थित शासकीय आवास पर कार्रवाई की।
- जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने 13 अक्टूबर को बिछुआ में प्रभारी डिप्टी रेंजर सुनील बनवारी को ₹3,000 की कथित रिश्वत लेते पकड़ा।
- शिकायतकर्ता के मुताबिक, लकड़ी कारोबार से जुड़े त्रैमासिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के बदले रकम मांगी गई थी।
- रिश्वत नहीं देने पर पंजीयन रद्द करने की धमकी देने का आरोप है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
Lokayukta action : मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने वन विभाग के वनपाल एवं प्रभारी डिप्टी रेंजर सुनील बनवारी को 3,000 रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। यह कार्रवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर को बिछुआ स्थित उनके शासकीय आवास पर की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लकड़ी कारोबार से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के बदले रिश्वत मांगी गई थी। रकम नहीं देने पर कारोबार का पंजीयन रद्द करने की धमकी देने का भी आरोप है।
तीन महीने की जानकारी पर हस्ताक्षर करने के बदले मांगी रकम
लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, बिछुआ निवासी मोखराम मालवीय के भाई लेखराम मालवीय के नाम पर इमारती लकड़ी के विनिर्माता एवं उपभोक्ता के रूप में पंजीयन है। फर्नीचर निर्माण के लिए अलग-अलग स्थानों से खरीदी जाने वाली लकड़ी का विवरण निर्धारित प्रक्रिया के तहत हर तीन महीने में वन विभाग को देना होता है। इस जानकारी से संबंधित दस्तावेजों पर विभागीय अधिकारी के हस्ताक्षर भी आवश्यक होते हैं।
शिकायतकर्ता मोखराम मालवीय का आरोप है कि इसी त्रैमासिक जानकारी पर हस्ताक्षर करने के एवज में प्रभारी डिप्टी रेंजर सुनील बनवारी ने उनसे 3,000 रुपये की मांग की थी। शिकायत के मुताबिक, रकम नहीं देने पर लकड़ी कारोबार का पंजीयन रद्द करने की धमकी भी दी जा रही थी।
शिकायत का सत्यापन करने के बाद बिछाया जाल
रिश्वत की कथित मांग से परेशान होकर मोखराम मालवीय ने जबलपुर लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की पुष्टि करने के बाद, टीम ने आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई। ऑपरेशन के तहत, शिकायतकर्ता बिछुआ में आरोपी के सरकारी आवास पर गया और उसे ₹3,000 दिए। उसी समय, वहां पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की और सुनील बनवारी को कथित रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ लिया।
इस ट्रैप कार्रवाई में लोकायुक्त टीम के निरीक्षक जितेंद्र यादव और निरीक्षक राहुल गजभिए सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। कार्रवाई के दौरान सामने आए तथ्यों और शिकायत के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 13(1)(बी) और 13(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है। इन धाराओं से संबंधित आरोपों पर मामले की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे निर्णय होगा। फिलहाल, रिश्वत मांगने और पंजीयन रद्द करने की धमकी देने से जुड़े आरोप शिकायत तथा लोकायुक्त की कार्रवाई के संदर्भ में सामने आए हैं। किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होता है।
इस कार्रवाई ने बिछुआ क्षेत्र में वन विभाग के कामकाज और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता को लेकर ध्यान खींचा है। लोकायुक्त संगठन की ओर से आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी शासकीय काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो इसकी शिकायत संबंधित लोकायुक्त कार्यालय में की जाए।

मेरा नाम शैलेन्द्र है, मैंने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से बी.कॉम. किया है। बी.कॉम. (कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक करने के बाद मैंने एल.एल.बी. भी किया है। मैं देश-दुनिया और सामाजिक सरोकारों से खुद को अवगत रखता हूँ और मुझे लिखने का शौक है। मुझे अच्छे लेख लिखना अच्छा लगता है।






