25 दिन घर में कैद रहे बुजुर्ग दंपती, मोबाइल पर फर्जी कोर्ट चलाकर साइबर ठगों ने ऐंठे लगभग 70 लाख
विदिशा के बंटी नगर में रिटायर्ड बिजली कर्मचारी और उनकी पत्नी को फर्जी सीबीआई अफसरों ने वीडियो कॉल पर नजरबंद रखा, मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर 69 लाख से ज्यादा ट्रांसफर करवाए।
Vidisha News : आजकल साइबर ठगी के मामले इतने आम हो गए हैं कि हर दिन कोई न कोई नई तरकीब सामने आ जाती है। लेकिन विदिशा का यह मामला सुनकर तो दिल बैठ जाता है। एक साधारण रिटायर्ड कर्मचारी अपने घर में बैठा था। अचानक फोन आया और फिर 25 दिनों तक वह और उनकी पत्नी अपने ही घर में कैद जैसे हालात में रहे। ठगों ने खुद को सीबीआई का अफसर बताया, मोबाइल पर फर्जी कोर्ट लगाई और लगभग 69 लाख रुपये निकलवा लिए। यह कोई फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि अक्टूबर 2026 में विदिशा के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के बंटी नगर में घटी सच्ची घटना है।
पीड़ित प्रदीप कपाड़े साल 2016 में बिजली विभाग से अकाउंटेंट के पद से रिटायर हुए थे। उनकी उम्र करीब 70 साल है। 5 अक्टूबर 2026 की सुबह उनके पास एयरटेल का नाम लेकर कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उनका सिम कार्ड फर्जी चल रहा है और मुंबई के कोलाबा थाने में एफआईआर दर्ज हो गई है। डर के मारे बुजुर्ग ने अपना आधार कार्ड और अन्य डिटेल शेयर कर दिए। कॉल कटते ही वीडियो कॉल शुरू हो गई। अब सामने वाले खुद को सीबीआई अधिकारी बताने लगे। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के केस का हवाला दिया और कहा कि जांच के दौरान आपको घर से बाहर नहीं निकलना है, किसी से बात भी नहीं करनी है।
ठगों ने इतना दबाव बनाया कि दंपती को लगता रहा कि असली पुलिस और कोर्ट ही काम कर रहे हैं। मोबाइल पर नकली अदालत का दृश्य दिखाया गया। ऑनलाइन याचिका दाखिल करने और सुनवाई करने का नाटक किया गया। बीच-बीच में धमकी दी जाती रही कि अगर पैसे नहीं दिए तो गिरफ्तारी हो जाएगी। इस दबाव में प्रदीप कपाड़े ने अपनी एफडी तोड़कर और सेविंग अकाउंट से पैसे निकालकर अलग-अलग खातों में भेजने शुरू कर दिए। 6 अक्टूबर से 22 अक्टूबर के बीच आठ बार ट्रांजेक्शन हुए। कुल रकम करीब 69.27 लाख रुपये पहुंच गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठग इतने सावधान थे कि पीड़ित को किसी रिश्तेदार या पड़ोसी से संपर्क नहीं करने दिया। 23 से 25 दिनों तक वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी चलती रही। एक दिन खाता ब्लॉक हो गया और पेमेंट अटक गई। तभी ठगों ने खुद सलाह दी कि साइबर ऑफिस जाकर खाता खुलवा लो। प्रदीप कपाड़े थाने पहुंचे और बेटे को पैसे भेजने की बात कही। पुलिस ने जब गहराई से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया।
सिविल लाइंस थाना पुलिस ने तुरंत चार-पांच टीमें गठित कीं। कुछ खातों में पड़े पैसे फ्रीज करवाए गए। शुरुआती रिपोर्ट्स में 22.75 लाख रुपये रोक लिए गए थे। 1 नवंबर 2026 को यानी मामला दर्ज होने के दूसरे दिन ही कोर्ट से आदेश निकलवा लिया गया कि पीड़ित परिवार को 28.33 लाख रुपये वापस किए जाएं। विदिशा पुलिस का कहना है कि जून 2026 तक जिले में 197 साइबर शिकायतों में से 1 करोड़ 80 लाख रुपये की रिकवरी पहले ही कराई जा चुकी है।
यह मामला अकेला नहीं है। देशभर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी बढ़ रही है। ठग सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स या जज बनकर वीडियो कॉल पर पीड़ितों को घंटों-घंटों तक बंधक बनाते हैं। खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाया जाता है क्योंकि वे आसानी से डर जाते हैं और परिवार से सलाह लेने से हिचकते हैं। सुप्रीम कोर्ट भी इस पर गंभीर है और बैंकों की जिम्मेदारी तय करने की बात कर रहा है।
आम आदमी के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। न तो पैसा मांगती है और न ही घर में कैद रखने का आदेश देती है। अगर कोई ऐसा कॉल आए तो तुरंत फोन काट दें, स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। आधार, पैन या बैंक डिटेल कभी भी अनजान व्यक्ति को न दें। परिवार के सदस्यों से बात करें। एक छोटी सी सावधानी कई लाख बचा सकती है।
विदिशा पुलिस अभी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। कई खातों के ट्रेल फॉलो किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि बाकी रकम भी जल्द वापस आ जाए और दोषियों को सजा मिले। लेकिन इस घटना से एक बात साफ हो गई है – डिजिटल दुनिया में भरोसा करने से पहले सौ बार सोचें। वरना आपका घर ही जेल बन सकता है।

नरसिंहपुर जिले की पत्रकारिता में अपनी एक अलग छवि रखने वाले खबरों को नए तरीके के साथ तीखे अंदाज में लिखने का हुनर बहुत अच्छे से जानते हैं . अब जनसंपर्क टाइम के लिए भी खबरें लिखेंगे






