लकड़ी बेचने पर दो लाख मांग रहा था ये अधिकारी, 20 हजार लेते पकड़ा गया
जावरा में किसान से दो लाख मांगने वाले अधिकारी को 20 हजार की पहली किस्त लेते लोकायुक्त टीम ने पकड़ लिया

रतलाम जिले के जावरा में एक किसान के लिए खेत में रखी जलाऊ लकड़ी बेचना परेशानी की वजह बन गया। आरोप है कि इस मामले में वन विभाग के एक अधिकारी ने कार्रवाई और केस दर्ज करने का डर दिखाकर उससे दो लाख रुपये की रिश्वत मांग ली। किसान ने अधिकारी की मांग के सामने झुकने के बजाय लोकायुक्त पुलिस से शिकायत कर दी। इसके बाद 30 अक्टूबर को उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया और जावरा उप वन मंडल में पदस्थ डिप्टी रेंजर कमल सिंह देवड़ा को 20 हजार रुपये लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया।
मामले में शुरुआती तौर पर दो लाख रुपये की मांग किए जाने और बातचीत के बाद 65 हजार रुपये पर सहमति बनने की बात सामने आई है। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद वन विभाग में भी इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
खेत की लकड़ी बेचने के मामले से शुरू हुआ विवाद
लोकायुक्त पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रहीश खां पिता अमीर शाह रतलाम जिले की पिपलोदा तहसील के ग्राम शक्करखेड़ी के निवासी हैं। उन्होंने अपने खेत में रखी जलाऊ लकड़ी अशफाक खान को बेची थी। इसी लेनदेन को लेकर जावरा उप वन मंडल में पदस्थ डिप्टी रेंजर कमल सिंह देवड़ा से उनका विवाद हुआ।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि डिप्टी रेंजर उन्हें इस मामले में कार्रवाई करने और केस दर्ज कराने की धमकी दे रहे थे। इसी कार्रवाई से बचने के बदले उनसे कथित तौर पर दो लाख रुपये की मांग की गई थी। एक किसान के लिए इतनी बड़ी रकम देना आसान नहीं था। रहीश खां ने अधिकारी की मांग के संबंध में लोकायुक्त पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शिकायतकर्ता ने पूरे घटनाक्रम को दबाने के बजाय इसकी जानकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसी तक पहुंचाई। इसी शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
दो लाख की मांग के बाद 65 हजार रुपये पर तय हुआ सौदा
रहीश खां ने 29 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त उज्जैन के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने डिप्टी रेंजर पर दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता ने बताया कि अधिकारी उनसे लकड़ी बेचने के मामले में कार्रवाई नहीं करने के बदले रकम मांग रहा था।
शिकायत के अनुसार, शुरुआत में दो लाख रुपये की मांग की गई थी। बाद में शिकायतकर्ता के निवेदन और बातचीत के दौरान कथित तौर पर 65 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। हालांकि, शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय लोकायुक्त पुलिस की मदद लेने का रास्ता चुना।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त उज्जैन के उप पुलिस अधीक्षक दिनेशचंद्र पटेल ने मामले की जांच शुरू कराई। सबसे पहले रिश्वत मांगने से संबंधित बातचीत का सत्यापन किया गया। शिकायत की पुष्टि होने के बाद टीम ने आगे की कार्रवाई की योजना तैयार की।
लोकायुक्त ने ऐसे बिछाया जाल, 20 हजार लेते ही पकड़ाया अधिकारी
शिकायत का सत्यापन होने के बाद उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप कार्रवाई के लिए 10 सदस्यीय दल गठित किया। टीम ने जावरा में योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की तैयारी की। इसके बाद शिकायतकर्ता रहीश खां को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20 हजार रुपये लेकर डिप्टी रेंजर के पास भेजा गया।
जैसे ही कमल सिंह देवड़ा ने शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये लिए, पहले से मौजूद लोकायुक्त की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया। इस तरह कथित तौर पर 65 हजार रुपये में तय हुए सौदे की पहली किस्त लेते समय अधिकारी लोकायुक्त के ट्रैप में आ गया।
इस कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक दिनेशचंद्र पटेल के साथ निरीक्षक हिना डाबर, प्रधान आरक्षक हितेश ललावत और आरक्षक शिवकुमार शर्मा, श्याम शर्मा, मोहम्मद इसरार व उमेश जाटव सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। लोकायुक्त की टीम में कुल 10 सदस्य बताए गए हैं।
2 लाख की मांग, 65 हजार का सौदा और 20 हजार की पहली किस्त
इस पूरे मामले में तीन अलग-अलग रकम सामने आई हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक, डिप्टी रेंजर ने शुरुआत में दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में बातचीत के बाद 65 हजार रुपये लेने पर सहमति बनी। लोकायुक्त की कार्रवाई के दिन शिकायतकर्ता पहली किस्त के तौर पर 20 हजार रुपये लेकर पहुंचे थे।
यानी लोकायुक्त की टीम ने अधिकारी को दो लाख या पूरे 65 हजार रुपये लेते हुए नहीं, बल्कि 20 हजार रुपये की पहली किस्त लेते समय पकड़ा। इस रकम को लेकर ही ट्रैप कार्रवाई की गई।

नरसिंहपुर जिले की पत्रकारिता में अपनी एक अलग छवि रखने वाले खबरों को नए तरीके के साथ तीखे अंदाज में लिखने का हुनर बहुत अच्छे से जानते हैं . अब जनसंपर्क टाइम के लिए भी खबरें लिखेंगे






