UPI Payment Update: ₹2,000 तक के पेमेंट पर नहीं लगेगा MDR, बड़े ट्रांजैक्शन के नए चार्ज पर भी आई राहत
UPI से बैंक ट्रांसफर ग्राहकों के लिए मुफ्त है। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट पर शून्य MDR रहेगा, जबकि बड़े भुगतानों पर प्रस्तावित बदलाव दिवाली के बाद लागू हो सकता है।

सब्जी वाले से लेकर किराना दुकान तक, आजकल हर छोटी-बड़ी खरीदारी में UPI का इस्तेमाल आम हो गया है। फोन निकाला, QR स्कैन किया और पैसे पहुँच गए। लेकिन कई लोगों के मन में एक सवाल बार-बार आता है – क्या छोटी रकम पर भी कोई छुपा हुआ चार्ज लग रहा है? खासकर ₹2000 तक के पेमेंट को लेकर अफवाहें काफी तेज हैं।
सच यह है कि ₹2000 तक के UPI लेनदेन पर न तो ग्राहक को कोई अतिरिक्त फीस देनी पड़ती है और न ही मर्चेंट को MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) चुकाना पड़ता है। यह राहत पहले से लागू है और अभी भी जारी है।
MDR क्या है, इसे आसान भाषा में समझें। जब कोई दुकानदार डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है तो बैंक या पेमेंट सिस्टम को कुछ फीस देनी पड़ती है। इसे ही MDR कहते हैं। लेकिन छोटी वैल्यू वाले लेनदेन पर सरकार और NPCI ने इसे शून्य रखा है ताकि आम आदमी और छोटे कारोबारी दोनों को फायदा हो। सब्जी, दूध, नाश्ता या छोटी खरीदारी में UPI इस्तेमाल करने वाले लोग बेफिक्र रह सकते हैं।
ग्राहक की तरफ से देखें तो बैंक अकाउंट से सीधे दुकानदार को पैसे भेजने पर कोई ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं लगता। चाहे आप अपने दोस्त को पैसे भेज रहे हों या खुद के दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर रहे हों – यह सब पूरी तरह मुफ्त है। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) वाले सभी ट्रांसफर किसी भी राशि पर फ्री रहते हैं।
मर्चेंट की तरफ से भी स्थिति साफ है। ₹2000 तक की पेमेंट पर दुकानदार को MDR नहीं देना पड़ता। छोटे दुकानदार, स्ट्रीट वेंडर या पड़ोस की दुकान जो महीने में एक लाख रुपये तक UPI QR से कमाई करते हैं, वे भी जीरो MDR कैटेगरी में आते हैं। इससे छोटे कारोबारियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।
RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से लिंक करके भी अगर ₹2000 तक का पेमेंट किया जाए तो योग्य छोटे मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR शून्य ही रहता है। इससे छोटे दुकानदारों को राहत मिलती है। सामान्य UPI यानी बैंक अकाउंट से सीधे पेमेंट करने पर ग्राहक पर कोई चार्ज नहीं लगता।
वॉलेट से UPI पेमेंट की बात थोड़ी अलग हो सकती है। योग्य मर्चेंट पेमेंट ₹2000 तक पर MDR जीरो रहता है। लेकिन कुछ प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट (PPI) वाले लेनदेन में ₹2000 से ऊपर इंटरचेंज चार्ज लग सकता है, जो मर्चेंट की कैटेगरी पर निर्भर करता है। आम यूजर के रोजमर्रा के छोटे पेमेंट पर इसका असर नहीं पड़ता।
हाल के महीनों में ऊपर की वैल्यू वाले मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने का प्रस्ताव आया था। यह ₹2000 से ऊपर के चुनिंदा P2M लेनदेन पर लागू होना था और ₹75,000 से ऊपर पर अधिकतम ₹300 की कैप थी। जरूरी सेक्टर जैसे रेलवे, टेलीकॉम, ईंधन आदि पर फ्लैट ₹5 का प्रावधान भी था। लेकिन इस फ्रेमवर्क को दीवाली के बाद तक टाल दिया गया है। नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल स्थिति वैसी ही है जैसी पहले थी – ₹2000 तक सब फ्री।
NPCI और सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक ₹2000 तक के ट्रांजेक्शन कुल P2M वॉल्यूम का 95 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं। इसलिए आम आदमी की रोजमर्रा की खरीदारी पर कोई असर नहीं पड़ रहा। उपभोक्ता को कभी भी MDR नहीं चुकाना पड़ता। मर्चेंट इसे ग्राहक पर नहीं डाल सकते। UPI ऐप्स भी प्लेटफॉर्म फीस नहीं ले सकते।
यह व्यवस्था डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए बनी है। छोटे-छोटे लेनदेन फ्री रखकर लाखों लोगों को कैश से डिजिटल की तरफ लाने में मदद मिली है। साथ ही सिस्टम को टिकाऊ बनाने के लिए ऊंची वैल्यू वाले लेनदेन पर सीमित शुल्क का विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी वह लागू नहीं हुआ है।
अगर आप रोजाना UPI इस्तेमाल करते हैं तो याद रखें – सब्जी, चाय, किराना या कोई छोटी खरीदारी ₹2000 के अंदर है तो बिना किसी झंझट के पेमेंट कर सकते हैं। कोई छुपा हुआ चार्ज नहीं है। अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा रखें। डिजिटल इंडिया की इस सुविधा का पूरा फायदा उठाएं।

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