करवाचौथ के व्रत को लेकर हंगामा पत्नी को थाने तक घसीटने पहुंचा पति जानिए मामला
शिवपुरी के बदरवास में पति ने पत्नी पर करवाचौथ का व्रत और चांद की पूजा नहीं करने का आरोप लगाकर पुलिस से शिकायत की। पुलिस काउंसलिंग कराएगी।

Karwa Chauth 2026 : करवाचौथ का दिन आमतौर पर प्यार और लंबी उम्र की कामना से जुड़ा होता है। महिलाएं दिनभर बिना पानी के व्रत रखती हैं, शाम को सज-धजकर पूजा करती हैं और चांद निकलते ही छलनी से पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में इस साल यह त्योहार एक अनोखे विवाद की वजह बन गया। बदरवास थाना क्षेत्र के बिजरावन गांव में एक पति अपनी पत्नी के खिलाफ थाने पहुंच गया। वजह? पत्नी ने उसके लिए करवाचौथ का व्रत नहीं रखा और न ही चांद की पूजा की।
बारेलाल आदिवासी, उम्र करीब 30 साल, ने थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने साफ लिखा कि उनकी पत्नी मिथलेश आदिवासी उनके साथ बेवफाई कर रही हैं। न तो उन्होंने करवाचौथ का निर्जला व्रत रखा और न ही रात को चांद देखकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। बारेलाल ने दावा किया कि उन्होंने पत्नी से कहा था कि कम से कम चांद तो देख लो, जिससे मेरी उम्र बढ़ जाए। लेकिन पत्नी ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहती है। आवेदन के अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस बार पत्नी ने उनकी पूजा नहीं की तो वह तलाक दे देंगे।
यह शिकायत थाने में पहुंचते ही चर्चा का विषय बन गई। कई लोग हैरान थे कि इतने निजी और पारंपरिक मामले को पुलिस के पास कैसे ले जाया जा सकता है। करवाचौथ मूल रूप से विश्वास और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में यह सिर्फ व्रत नहीं, बल्कि साल भर के रिश्ते को मजबूत करने का मौका होता है। लेकिन जब रिश्तों में पहले से ही दरार होती है तो छोटी-छोटी बातें भी बड़ा रूप ले लेती हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि दोनों के बीच लंबे समय से मनमुटाव चला आ रहा था। पुलिस के अनुसार आवेदन देते समय बारेलाल कुछ नशे की हालत में भी नजर आए थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग है।
कोलारस के एसडीओपी संजय मिश्रा ने मामले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि बारेलाल आदिवासी का आवेदन दर्ज हुआ है। पुलिस इसे पारिवारिक विवाद मान रही है। उन्होंने साफ कहा कि महिला पुलिस अधिकारी के माध्यम से दोनों के बीच समझाइश कराने का प्रयास किया जाएगा। लक्ष्य है कि विवाद बढ़ने न पाए और दोनों में सुलह हो जाए। अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। पुलिस का रुख साफ है कि ऐसे मामलों में काउंसलिंग बेहतर उपाय है बजाय इसके कि मामला अदालत या लंबे कानूनी झगड़े में जाए।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि कई सवाल खड़े करती है। करवाचौथ जैसी परंपराएं आज भी कई घरों में बहुत गंभीरता से निभाई जाती हैं। कुछ लोग इन्हें आस्था का हिस्सा मानते हैं, कुछ सामाजिक दबाव। लेकिन जब कोई व्यक्ति व्रत न रखने को बेवफाई या जानबूझकर नुकसान पहुंचाने से जोड़ देता है तो रिश्ते की बुनियाद पर सवाल उठता है। दोनों पक्षों की बात सुने बिना किसी एक को दोषी ठहराना सही नहीं। पत्नी की तरफ से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। हो सकता है कि स्वास्थ्य, व्यक्तिगत कारण या आपसी मतभेद की वजह से व्रत न रखा हो। ऐसे मामलों में खुली बातचीत सबसे जरूरी होती है।
शिवपुरी जैसे इलाकों में जहां आदिवासी समुदाय भी काफी संख्या में रहते हैं, पारंपरिक रीति-रिवाज अभी भी मजबूत हैं। गांव के लोग अक्सर छोटी-मोटी बातों पर भी एक-दूसरे को समझाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब बात थाने तक पहुंच जाए तो समझना चाहिए कि अंदरूनी तनाव काफी गहरा हो चुका है। पुलिस का फैसला सही दिशा में लगता है। महिला अधिकारी के जरिए दोनों को बैठाकर बात कराना, भावनाओं को समझने की कोशिश करना और समाधान निकालना। कई बार ऐसे विवाद सिर्फ गलतफहमी या गुस्से की वजह से बढ़ जाते हैं।
करवाचौथ 2026 इस साल 29 अक्टूबर को पड़ा। पूरे देश में लाखों महिलाओं ने व्रत रखा। चांद देखने का इंतजार किया। कई जगहों पर मौसम की वजह से चांद देर से दिखा तो इंतजार लंबा हो गया। लेकिन शिवपुरी के इस मामले ने सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में जगह बना ली। लोग पूछ रहे हैं कि क्या परंपरा इतनी सख्त होनी चाहिए कि व्रत न रखने पर तलाक की बात हो जाए? या फिर रिश्तों में सम्मान और समझदारी ज्यादा जरूरी है?
बारेलाल का आवेदन पढ़कर कई लोग मुस्कुराए भी। “चांद देख ले जिससे मेरी उम्र बढ़ जाए” वाली लाइन काफी वायरल हुई। लेकिन हंसी के पीछे एक गंभीर बात छिपी है। जब कोई व्यक्ति इतनी छोटी बात पर पुलिस के पास जाता है तो जाहिर है कि घर में माहौल ठीक नहीं है। लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास, गुस्सा या बातचीत की कमी ऐसे रूप ले लेती है। पुलिस का काम अब दोनों को एक मेज पर बिठाना है। अगर समझाइश से काम बन जाए तो बेहतर। नहीं तो कानूनी रास्ता भी खुला है, लेकिन वह लंबा और थकाऊ होता है।

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