उज्जैन होटल हादसा: वेस्टेज चैंबर की सफाई करने उतरे 4 कर्मचारियों की मौत, बचाने पहुंचे लोग भी गैस की चपेट में आए
देवास रोड स्थित होटल में शनिवार रात फूड वेस्ट चैंबर की सफाई के दौरान हादसा हुआ। पहले दो कर्मचारी अंदर उतरे, फिर उन्हें बचाने दो अन्य लोग भी चैंबर में गए।

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में शनिवार रात एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने कामकाज के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवास रोड स्थित होटल श्री गंगा में वेस्टेज चैंबर की सफाई करने उतरे चार लोगों की जान चली गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चैंबर के अंदर मौजूद गैस के कारण कर्मचारियों की हालत बिगड़ी और वे बाहर नहीं निकल पाए। उन्हें बचाने की कोशिश में दो अन्य लोग भी बीमार हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना शनिवार, 31 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे और उनके निर्देशन में देर रात तक बचाव अभियान चलाया गया। चैंबर की बनावट और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने में आ रही परेशानी के कारण इलेक्ट्रिक कटर की मदद लेनी पड़ी।
कैसे हुआ उज्जैन के होटल में यह हादसा?
जानकारी के मुताबिक, होटल श्री गंगा के दाईं ओर एक वेस्टेज चैंबर बना हुआ है। होटल की मिठाई और डेयरी उत्पाद बनाने वाली इकाई से निकलने वाला बचा हुआ खाना, चाशनी, घी-तेल और अन्य अवशेष इसी चैंबर में जमा होते हैं। समय के साथ इसमें कचरा जमा होने और निकासी व्यवस्था प्रभावित होने पर इसकी सफाई की जरूरत पड़ती है।
शनिवार रात इसी चैंबर की सफाई का काम किया जा रहा था। जिला कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के शुरुआती बयान के अनुसार, पहले दो लोग सफाई के लिए टैंक के अंदर उतरे थे। काफी देर तक जब वे बाहर नहीं आए तो उन्हें बचाने के लिए दो अन्य लोग भी अंदर चले गए। इसके बाद कुल चारों लोग चैंबर में फंस गए और उनकी मौत हो गई।
प्रारंभिक जानकारी में चैंबर के भीतर गैस का रिसाव और वहां मौजूद खतरनाक वातावरण हादसे की संभावित वजह बताए जा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने भी गैस के प्रभाव और चैंबर की फिसलन भरी सतह को लेकर आशंका जताई है। हालांकि, अभी यह आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हुआ है कि अंदर कौन-सी गैस मौजूद थी और चारों कर्मचारियों की मौत का सटीक कारण क्या रहा।
इलेक्ट्रिक कटर से काटना पड़ा चैंबर, देर रात तक चला रेस्क्यू
हादसे की जानकारी सामने आते ही होटल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। होटल के कर्मचारी और आसपास मौजूद लोगों ने अपने स्तर पर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस, एंबुलेंस और बचाव दल को सूचना दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती चैंबर के अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। चैंबर का रास्ता आसानी से नहीं खुल रहा था। ऐसे में पास में चल रहे निर्माण कार्य से इलेक्ट्रिक कटर मंगवाया गया। इसकी मदद से चैंबर के गेट या उसके हिस्से को काटकर बाहर निकलने का रास्ता बनाया गया।
करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद चारों लोगों को बाहर निकाला गया। घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उन्हें सीपीआर देने की कोशिश की। बचाव दल और पुलिसकर्मी लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन चारों की जान नहीं बचाई जा सकी। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
रेस्क्यू के दौरान बचाव कार्य में लगे अन्य लोगों की तबीयत भी प्रभावित हुई। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिपोर्टों में बचाव अभियान के दौरान एक सब-इंस्पेक्टर के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।
हादसे में किन लोगों की गई जान?
इस घटना में चार लोगों की मौत हुई है। शुरुआती स्थानीय रिपोर्टों में मृतकों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:
- कमलेश, पिता सोहनलाल, निवासी वाल्मीकि नगर, उज्जैन।
- नितिन, पिता ताराचंद, निवासी वाल्मीकि नगर, उज्जैन।
- वाहिद, निवासी सोमवारिया, उज्जैन।
- मनोज मीणा, निवासी झालावाड़, राजस्थान।

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