मध्य प्रदेश और स्थानीय समाचार

मध्य प्रदेश में कमजोर पड़ा चक्रवात अर्नब, बारिश का दौर होगा कम? IMD का नया अपडेट जानिए

चक्रवात अर्नब का अवशेष कम दबाव के क्षेत्र में बदल चुका है। IMD के ताजा बुलेटिन में 31 अक्टूबर को दोनों मौसम संभागों के लिए कोई चेतावनी नहीं है।

  • रीवा, शहडोल और सागर में तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री तक गिरा।
  • अनूपपुर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज, कई जिलों में आज भी गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट।
  • चक्रवात कमजोर पड़ चुका है, लेकिन 2 नवंबर तक कुछ इलाकों में मौसम उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है।

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मौसम ने ऐसा करवट बदला है कि लोगों को अक्टूबर के आखिरी दिनों में ही ठंडक का अहसास होने लगा है। कहीं आसमान में बादल छाए रहे तो कहीं तेज हवाओं के साथ बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। खासतौर पर विंध्य, महाकौशल और बुंदेलखंड के कई इलाकों में बदले मौसम का असर देखने को मिला। इस पूरे बदलाव के पीछे चक्रवात ‘अर्नब’ के अवशेष से बना कम दबाव का क्षेत्र एक प्रमुख कारण रहा है।

हालांकि, अब इस मौसमी प्रणाली की ताकत पहले जैसी नहीं रही। 31 अक्टूबर 2026 को सामने आए मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में फिलहाल भारी बारिश को लेकर कोई नया संभागीय अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदेश के हर जिले में मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। कुछ स्थानों पर बादल, हल्की बारिश और स्थानीय मौसम गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में पहले जारी किए गए भारी बारिश के अलर्ट और आज की मौसम स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।

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कमजोर पड़ गया चक्रवात अर्नब, अब ऐसी है मौसम प्रणाली की स्थिति

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ चक्रवात अर्नब अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में मध्य भारत के मौसम को प्रभावित करने लगा था। शुरुआत में इस प्रणाली के कारण आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी। इसका प्रभाव प्रदेश के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में अधिक दिखाई दिया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग की 29 अक्टूबर की जानकारी के अनुसार, चक्रवात अर्नब कमजोर होकर अवदाब यानी डिप्रेशन में बदल गया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इसका बचा हुआ हिस्सा और कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल चुका है। 30 अक्टूबर की सुबह 8:30 बजे यह उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर स्थित था।

मौसम प्रणाली के कमजोर होने का सीधा असर बारिश की तीव्रता पर पड़ सकता है। यही कारण है कि पहले जहां कई इलाकों में भारी बारिश की आशंका जताई जा रही थी, वहीं अब पूर्वानुमान में मुख्य रूप से कहीं-कहीं हल्की से मध्यम और छिटपुट बारिश की संभावना दिखाई दे रही है।

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यहां एक बात समझना जरूरी है कि चक्रवात कमजोर पड़ने का मतलब यह नहीं है कि उसका मौसम पर असर तत्काल समाप्त हो जाता है। कम दबाव का क्षेत्र भी वातावरण में नमी बनाए रख सकता है। इसके कारण स्थानीय स्तर पर बादल बनने और कहीं-कहीं बारिश होने की स्थिति बनी रह सकती है।

रीवा, शहडोल और सागर संभाग में बदले मौसम का असर

चक्रवात अर्नब के प्रभाव से मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मौसम की गतिविधियां अधिक देखने को मिलीं। रीवा, मऊगंज, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल और उमरिया जैसे जिलों में बादल और बारिश की स्थिति बनी रही। सागर संभाग के कुछ इलाकों में भी मौसम में बदलाव महसूस किया गया।

बारिश के कारण दिन के तापमान पर भी असर पड़ा। 30 अक्टूबर की मौसम संबंधी रिपोर्टों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट का उल्लेख किया गया था। पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई थी।

हालांकि, अलग-अलग जिलों में तापमान की स्थिति एक जैसी नहीं रही। कहीं दिन में बादलों के कारण धूप कमजोर रही तो कहीं बारिश के बाद शाम और सुबह के समय हल्की ठंडक महसूस की गई। इस मौसम में दिन और रात के तापमान का अंतर भी लोगों को अलग-अलग परिस्थितियों का अनुभव करा सकता है।

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31 अक्टूबर को IMD का नया अपडेट, भारी बारिश का अलर्ट नहीं

मध्य प्रदेश के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी मौसम विभाग का 31 अक्टूबर को जारी किया गया ताजा चेतावनी बुलेटिन है। IMD भोपाल की संभागवार चेतावनी के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश दोनों के लिए 31 अक्टूबर को कोई मौसम चेतावनी दर्ज नहीं की गई है।

इस अपडेट में 1 नवंबर, 2 नवंबर, 3 नवंबर और 4 नवंबर के लिए भी दोनों संभागों में कोई चेतावनी नहीं दिखाई गई है। इसका अर्थ है कि पहले जारी किए गए कई जिलों के अलर्ट को आज की स्थिति मानकर नहीं चलना चाहिए।

हालांकि, मौसम विभाग की 30 अक्टूबर की प्रेस विज्ञप्ति में प्रदेश के दोनों हिस्सों में 30 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच कहीं-कहीं से लेकर कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना जताई गई थी। इसके अलावा 30 और 31 अक्टूबर को पूर्वी तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश में तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान भी था। हवाओं की सामान्य रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों के साथ 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना बताई गई थी।

इसलिए लोगों को यह समझना चाहिए कि किसी संभाग के लिए चेतावनी जारी नहीं होने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना बने रहने में अंतर है। हल्की बारिश संभव है, लेकिन इसका अर्थ पूरे प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट नहीं है।

भोपाल, इंदौर और जबलपुर में कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी भोपाल में पिछले दिनों बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिला। आसमान में बादल छाए रहने से दिन की धूप भी प्रभावित हुई। हालांकि, 31 अक्टूबर के IMD भोपाल संभागीय बुलेटिन में पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए कोई चेतावनी दर्ज नहीं की गई है।

इंदौर और उज्जैन सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी मौसम की स्थिति स्थानीय बादलों और तापमान पर निर्भर करेगी। हर शहर में एक जैसी बारिश होना जरूरी नहीं है। किसी इलाके में आसमान साफ रह सकता है तो आसपास के क्षेत्रों में बादल दिखाई दे सकते हैं।

जबलपुर और पूर्वी मध्य प्रदेश के दूसरे शहरों में भी मौसम प्रणाली के कमजोर होने के साथ बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बारिश और तेज हवा की स्थिति से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए यात्रा करने वाले लोगों को अपने शहर का ताजा पूर्वानुमान जरूर देखना चाहिए।

2 नवंबर तक कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?

मौसम विभाग की 30 अक्टूबर की प्रेस विज्ञप्ति में मध्य प्रदेश में 4 नवंबर तक कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना जताई गई थी। इसका अर्थ है कि नवंबर की शुरुआत में भी कुछ इलाकों में बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है।

हालांकि, 31 अक्टूबर को जारी संभागीय चेतावनी में 1 और 2 नवंबर के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है। इसलिए इन तारीखों में भारी बारिश की आशंका को लेकर कोई नया राज्यव्यापी अलर्ट मानना सही नहीं होगा।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि मौसम में होने वाले बदलाव का असर प्रदेश के सभी जिलों पर समान नहीं पड़ता। विंध्य और महाकौशल के कुछ हिस्सों में बादलों की मौजूदगी रह सकती है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपेक्षाकृत सामान्य मौसम देखने को मिल सकता है। वास्तविक स्थिति संबंधित जिले के स्थानीय पूर्वानुमान पर निर्भर करेगी।

Manoj Noriya

नरसिंहपुर जिले की पत्रकारिता में अपनी एक अलग छवि रखने वाले खबरों को नए तरीके के साथ तीखे अंदाज में लिखने का हुनर  बहुत अच्छे से जानते हैं . अब जनसंपर्क टाइम के लिए भी खबरें लिखेंगे

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