MP विधानसभा में दिसंबर में बड़ा मुकाबला, अनुपूरक बजट पर सरकार और विपक्ष होंगे आमने-सामने
राज्यपाल की अधिसूचना जारी, सत्र में दूसरा अनुपूरक बजट और संशोधन विधेयक आने की संभावना, विपक्ष किसान मुद्दों पर हमलावर

Madhya Pradesh Assembly Schedule 2026 : अरे भाई, ठंड पड़ने वाली है और भोपाल में फिर से राजनीतिक माहौल गरम होने वाला है। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आ गया है। 7 दिसंबर से 11 दिसंबर तक पांच दिन का ये सत्र चलेगा। कोई छुट्टी नहीं, रोज बैठक। हम गांव वाले जब सर्दी में अलाव के पास बैठकर बात करते हैं तो यही सोचते हैं कि ऊपर वाले क्या कर रहे हैं। इस बार भी वही होगा।
विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सदन को बुलाया है। 16वीं विधानसभा का ये 12वां सत्र है। पहले दिन से ही प्रश्नोत्तर काल रहेगा। उसके बाद सरकारी कामकाज। आखिरी दिन 11 दिसंबर को दोपहर डेढ़ बजे तक सरकारी काम और उसके बाद अशासकीय प्रस्तावों पर चर्चा।
सरकार इस छोटे से सत्र में दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने वाली है। साथ में कई विभागों से जुड़े संशोधन विधेयक भी आ सकते हैं। पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था। पैसा कहां खर्च होगा, योजनाओं को कितना और पैसा मिलेगा, ये सब सदन में आएगा। हम किसान लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाद बीज और बिजली का क्या होगा।
विपक्ष भी तैयार बैठा है। कांग्रेस समेत दूसरे दल किसान समस्याओं, खाद की कमी, बिजली कटौती और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठा सकते हैं। गांव में अभी भी बहुत जगहों पर खाद समय पर नहीं मिलती। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला भी चर्चा में रहता है। ये सत्र छोटा है लेकिन मुद्दे बड़े हैं। दोनों तरफ से जोरदार बहस की उम्मीद है।

इस बार एक नई बात और है। विधानसभा का कामकाज पूरी तरह पेपरलेस हो रहा है। नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन यानी NeVA के जरिए सब कुछ डिजिटल चलेगा। सवाल मंजूर हुआ या विचाराधीन है, उसका स्टेटस रियल टाइम में दिखेगा। पुराने जमाने में कागजों के ढेर लगते थे। अब स्क्रीन पर सब कुछ। विधायकों के लिए सुविधा बढ़ेगी। गांव से आने वाले विधायक भी अब फोन और टैबलेट पर काम देख सकेंगे।
विधानसभा सचिवालय ने तैयारी शुरू कर दी है। विधायकों से सवाल मांगे जा रहे हैं। स्टार और अनस्टार सवाल दोनों। निजी सदस्यों के विधेयकों के नोटिस 11 नवंबर तक और प्रस्तावों के 26 नवंबर तक जमा हो सकते हैं। स्थगन और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव 1 दिसंबर से स्वीकार होंगे।
हम आम लोगों के लिए ये सत्र सिर्फ तारीखों का खेल नहीं है। इसमें बजट आता है तो योजनाओं का पैसा तय होता है। किसान कर्ज माफी, आवास योजना, लाडली बहना जैसी चीजें सीधे गांव तक पहुंचती हैं। अगर सदन में सही चर्चा हुई तो फायदा सबको होगा। अगर सिर्फ हंगामा हुआ तो समय जाया।
7 दिसंबर आते-आते ठंड और बढ़ जाएगी। भोपाल में सियासी तापमान भी ऊपर जाएगा। पांच दिन में कितना काम होता है, ये तो सत्र खत्म होने के बाद पता चलेगा। लेकिन अधिसूचना आ चुकी है। अब इंतजार है 7 दिसंबर का।

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