मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धनतेरस पर छुट्टी की मांग ठुकराई, 6 नवंबर को अदालतें सामान्य रहेंगी
इंदौर बार एसोसिएशन की मांग खारिज, प्रदेशभर की अदालतें 6 नवंबर को सामान्य रूप से खुली रहेंगी

त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। घर-घर में दीये सजने वाले हैं, सोना-चांदी खरीदने की भीड़ लगेगी, लेकिन मध्य प्रदेश की अदालतों में इस बार धनतेरस का दिन सामान्य कामकाज का रहेगा। 6 नवंबर शुक्रवार को प्रदेशभर के हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों में कोई अवकाश नहीं रहेगा। अधिवक्ताओं ने धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला देते हुए छुट्टी की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट प्रशासन ने इसे स्वीकार नहीं किया।
इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव और सचिव मनीष गड़कर ने 23 अक्टूबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था। पत्र में न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं की भावनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया था कि धनतेरस पर अवकाश घोषित किया जाए। यह पत्र रजिस्ट्रार के माध्यम से भेजा गया था। लेकिन प्रिंसिपल रजिस्ट्रार ने इस मांग को नहीं माना। नतीजतन जबलपुर मुख्यपीठ, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों के साथ-साथ पूरे प्रदेश की जिला अदालतें 6 नवंबर को सामान्य रूप से खुली रहेंगी।
यह फैसला अचानक नहीं आया। इससे पहले भी अदालतों के कैलेंडर में बदलाव हुए हैं। अगस्त में ईद मिलादुन्नबी और रक्षाबंधन के बीच 27 अगस्त को एक दिन का अवकाश घोषित किया गया था। उसके बदले में 19 सितंबर की छुट्टी रद्द कर दी गई थी। शनिवार होने के बावजूद उस दिन इंदौर खंडपीठ और जिला अदालतों में सामान्य कामकाज चला था। उसी तरह का प्रशासनिक रुख इस बार भी दिख रहा है। अदालतें कामकाज को प्राथमिकता दे रही हैं।
धनतेरस का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर पड़ता है। इस साल यह 6 नवंबर को आ रहा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है। लोग सोना, चांदी, बर्तन और नए सामान खरीदते हैं। शाम को यम दीपदान की परंपरा भी है। पूरे देश में यह दिन उत्सव का माना जाता है। कई जगह स्थानीय अवकाश भी घोषित होते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश की न्यायपालिका ने इस बार इसे सामान्य कार्य दिवस ही रखा है।
कुछ अधिवक्ताओं का मानना है कि जिला न्यायपालिका के लिए पहले से धनतेरस पर अवकाश की घोषणा हो चुकी थी, लेकिन हाईकोर्ट की मुख्यपीठ और खंडपीठों के लिए अभी तक स्पष्ट नहीं था। इसलिए बार एसोसिएशन ने मांग की थी। अब जब प्रशासनिक फैसला आ गया है तो अधिवक्ताओं को उसी के अनुसार तैयारी करनी होगी। अदालतों में पेशी वाले वादकारियों को भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि 6 नवंबर को अदालतें बंद नहीं रहेंगी।
पिछले वर्षों में कई बार अधिवक्ताओं की मांग पर अवकाश घोषित किए गए हैं। 27 अगस्त वाला बदलाव भी इसी क्रम में था। उस समय लगातार तीन दिन का अवकाश हो गया था। कुछ जगहों पर कर्मचारियों को शनिवार-रविवार मिलाकर पांच दिन की छुट्टी भी मिल गई थी। इस बार हालांकि मांग खारिज हो गई, लेकिन यह दिखाता है कि अदालतें त्योहारों और कामकाज के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।
त्योहारों के मौसम में अदालतों का खुलना कई लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है। खासकर वे जो परिवार के साथ पूजा-पाठ या खरीदारी के लिए समय निकालना चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर, लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए प्रशासनिक फैसला समझ में आता है। अदालतों में कामकाज रुकने से मामलों का बोझ बढ़ता है। इसलिए सामान्य दिनों में काम जारी रखने का फैसला लिया गया है।
6 नवंबर को अदालतों में जाने वाले अधिवक्ताओं और कर्मचारियों को भी त्योहार का माहौल महसूस होगा। कई लोग सुबह-शाम पूजा करके अदालत पहुंचेंगे। कुछ लोग ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प भी इस्तेमाल कर सकते हैं जहां उपलब्ध हो। लेकिन मुख्य बात यह है कि अदालती कामकाज में कोई बाधा नहीं आएगी।
यह फैसला पूरे प्रदेश पर लागू है। जबलपुर से लेकर इंदौर और ग्वालियर तक सभी जगह एक जैसी स्थिति रहेगी। जिला अदालतों में भी सामान्य पेशियां चलेंगी। जो लोग सोच रहे थे कि धनतेरस पर छुट्टी मिलेगी, उन्हें अब अपनी योजनाएं बदलनी होंगी। खरीदारी या पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए या तो पहले का समय निकालना होगा या शाम के बाद का।

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