कटनी की निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया पर बढ़ा शिकंजा, लुकआउट नोटिस को लेकर मुख्य सचिव को भेजा पत्र
लुकआउट नोटिस की कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन ने मुख्य सचिव को जानकारी भेजी है। SIT जांच जारी है और हाईकोर्ट में नेहा की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित है।

MP Police News 2026 : एयर होस्टेस की नौकरी छोड़कर पुलिस सेवा में आने वाली एक महिला अधिकारी आज पूरे मध्य प्रदेश की चर्चा में हैं। कटनी की पूर्व सिटी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस नेहा पचिसीया पिछले कई हफ्तों से पुलिस की नजरों से गायब हैं। इनाम घोषित हो चुका है, SIT गठित है, अदालत से राहत नहीं मिली, फिर भी वह कहां हैं—यह सवाल अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है।
कटनी जिला प्रशासन ने इस मामले को और गंभीरता से लिया है। अपर कलेक्टर नीलांबर मिश्रा ने राज्य के मुख्य सचिव को एक विस्तृत पत्र भेजा है। पत्र में साफ लिखा गया है कि सीएसपी नेहा पचिसीया और दो अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई थी, लेकिन नतीजा अभी शून्य है। शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है।
पत्र में एक और महत्वपूर्ण बात का जिक्र है। शिकायतकर्ता के वकील अवनीश तिवारी ने राष्ट्रपति कार्यालय में आवेदन दिया था। उसमें तीनों आरोपियों नेहा पचिसीया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की मांग की गई थी। राष्ट्रपति कार्यालय ने इस आवेदन को ईमेल के जरिए आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित स्तर पर भेजा। कटनी प्रशासन ने इस पूरे पत्राचार की कॉपी मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र के साथ संलग्न की है।
मामला अगस्त 2026 का है। कुठला थाने में नेहा पचिसीया समेत तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और पद के कथित दुरुपयोग समेत विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज हुई। पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी पर दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया। बाद में कुछ रिपोर्टों में इनाम बढ़ाने की बात भी आई, लेकिन मूल रूप से इनाम की घोषणा हो चुकी है। विभागीय जांच के बाद नेहा पचिसीया को निलंबित कर पुलिस मुख्यालय भोपाल अटैच किया गया था, लेकिन वे वहां भी रिपोर्ट नहीं हुईं।
आरोप क्या हैं? शिकायत के अनुसार कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज एक हत्या के मामले में निर्धारित समय सीमा के अंदर चालान पेश नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिल गई। आरोप है कि इसके बदले में आरोपी पक्ष की जमीन को बहुत कम कीमत पर एजेंट के नाम पर खरीद लिया गया। जमीन की कीमत करीब एक करोड़ से ऊपर बताई जाती है, जबकि सौदा बहुत कम राशि में हुआ। ये आरोप जांच और अदालती प्रक्रिया के अधीन हैं। अंतिम सत्य तभी सामने आएगा जब जांच पूरी होगी और अदालत फैसला सुनाएगी।
जिला अदालत ने पहले ही नेहा पचिसीया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हुई। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति राजकुमार चौबे की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। बचाव पक्ष का कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री में नेहा पचिसीया की कोई सीधी भूमिका नहीं थी। जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी। अदालत का आदेश अभी आना बाकी है।
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के फरार होने तक सीमित नहीं है। यह पुलिस व्यवस्था, जांच की गति और जवाबदेही के बड़े सवाल भी खड़े करता है। एक तरफ जहां आम आदमी छोटी-छोटी गलतियों पर भी सख्ती देखता है, वहीं एक सीनियर अधिकारी के खिलाफ इतने दिनों तक गिरफ्तारी न हो पाना लोगों के मन में कई सवाल पैदा कर रहा है। प्रशासन अब लुकआउट नोटिस की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ताकि आरोपी देश छोड़कर न भाग सकें।
नेहा पचिसीया का सफर भी दिलचस्प रहा है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की रहने वाली नेहा ने पहले एयर इंडिया में एयर होस्टेस के रूप में काम किया। बाद में पुलिस सेवा में आईं। गुना में पहली पोस्टिंग, फिर मुख्यालय और खंडवा। मई 2025 में कटनी सिटी सीएसपी बनीं। कुछ ही समय में उनका नाम विवादों में आ गया।
फिलहाल पूरा मामला जांच और अदालत के अधीन है। आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। SIT बैंक लेनदेन, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी कर रही हैं। लेकिन तीनों आरोपी अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। कटनी प्रशासन का मुख्य सचिव को भेजा गया पत्र इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक स्तर पर भी दबाव बढ़ रहा है।

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