‘खुशी से दे तो मना नहीं करेंगे…’ यही बात भारी पड़ी, पन्ना के EE अहिरवार हुए सस्पेंड, जानिए पूरा मामला
पन्ना में 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद वायरल हुआ था ईई का बयान, 30 अक्टूबर को शासन ने जारी किया निलंबन आदेश।

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग से जुड़ा रिश्वतखोरी का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले लोकायुक्त की कार्रवाई में विभाग के दो कर्मचारी 45 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते पकड़े गए और उसके बाद विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार का एक बयान चर्चा में आ गया। मीडिया के सामने रिश्वत को लेकर दिया गया उनका जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। मामला सामने आने के बाद अब राज्य सरकार ने उनके खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि अधिकारी ने कैमरे के सामने रिश्वत मांगने और स्वेच्छा से दिए जाने वाले पैसों के बीच अंतर बताने की कोशिश की थी। उनका बयान कुछ ही समय में चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद शासन ने उनके आचरण को सरकारी सेवा के नियमों के अनुरूप नहीं माना और निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
दरअसल, पन्ना जिले के जल संसाधन विभाग में सागर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने 28 अक्टूबर 2026 को ट्रैप कार्रवाई की थी। इस दौरान विभाग के संभागीय लेखाधिकारी और एक लिपिक को कथित तौर पर 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। लोकायुक्त की यह कार्रवाई मझगांय बांध की नहर निर्माण परियोजना से जुड़े भुगतान के मामले में की गई थी।

जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर निवासी ठेकेदार गौरव तोमर इस परियोजना में निर्माण कार्य करा रहे थे। ठेकेदार का आरोप था कि काम से संबंधित अंतिम बिल को पास कराने और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए विभाग के कर्मचारियों की ओर से रिश्वत मांगी जा रही थी। लगातार चक्कर लगाने के बाद उन्होंने सागर लोकायुक्त कार्यालय में इसकी शिकायत की थी। शिकायत मिलने पर लोकायुक्त टीम ने पहले मामले का सत्यापन कराया और इसके बाद कार्रवाई की योजना बनाई।
लोकायुक्त की टीम ने निर्धारित योजना के तहत विभागीय कार्यालय में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान संभागीय लेखाधिकारी दीपक परिहार को 15 हजार रुपये और सहायक ग्रेड-2 लिपिक अरविंद पाठक को 30 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया। इस तरह दोनों कर्मचारियों के पास से कुल 45 हजार रुपये की कथित रिश्वत बरामद हुई। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
इस कार्रवाई के बाद मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। जब विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार से मीडिया ने रिश्वतखोरी और कमीशन के बारे में सवाल किया, तो उनका जवाब सुर्खियों में आ गया। उन्होंने कहा कि वह किसी से रिश्वत की मांग नहीं करते और न ही उनका कोई निश्चित प्रतिशत या कमीशन तय है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी खुशी से कुछ दे देता है, तो वह उसे लेने से मना नहीं करते।
उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। सरकारी विभाग में जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी की ओर से इस तरह की बात कहे जाने पर सवाल उठे। लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी से स्वेच्छा से पैसा लेने की बात स्वीकार करता है, तो क्या यह सरकारी सेवा के निर्धारित आचरण के अनुरूप हो सकता है?
इसी बीच मध्य प्रदेश शासन ने सीबी अहिरवार के खिलाफ निलंबन का आदेश जारी कर दिया। उपलब्ध आदेश विवरण के अनुसार, मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 को आदेश क्रमांक एफ 6/2/0006/2026/पी-2/31 जारी किया। इसमें 28 अक्टूबर को दिए गए उनके बयान का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह वक्तव्य सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ और इसमें उनके आचरण से संबंधित अनुचित स्वीकारोक्ति सामने आई।
शासन ने इस मामले को मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3(1)(एफ) और 3(1)(तीन) का उल्लंघन माना है। सरकारी कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने पद की गरिमा बनाए रखे, पूरी निष्ठा से काम करे और ऐसा कोई व्यवहार न करे जो सरकारी सेवा की मर्यादा के विपरीत हो। इसी आधार पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत उन्हें निलंबित किया गया है।
निलंबन के बाद सीबी अहिरवार का मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह आदेश जल संसाधन विभाग के अपर सचिव रवीन्द्र कुमार चौधरी की ओर से जारी किया गया है।

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