धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू युवतियों को दी नसीहत, दमोह में बुर्के को लेकर दिए बयान पर चर्चा
मध्य प्रदेश के दमोह में सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवतियों को संबोधित करते हुए धार्मिक पहचान और संस्कृति पर टिप्पणी की।
Dhirendra Krishna Shastri News : मध्य प्रदेश के दमोह में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान चर्चा में है। सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के दौरान पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित आशीर्वचन कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू युवतियों को संबोधित करते हुए कहा, “दुर्गा बनो, काली बनो, लेकिन बुर्के वाली नहीं।” 13 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, उनके संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। बयान में धार्मिक पहचान और युवतियों को दी गई सलाह को लेकर चर्चा हो रही है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की रथयात्रा मंगलवार को दमोह पहुंची थी। यात्रा का जिले में हटा से आगमन हुआ, जिसके बाद यह पटेरा और हिंडोरिया होते हुए दमोह शहर पहुंची। रास्ते में श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सभा को संबोधित किया।
युवतियों को दी सलाह
अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवतियों से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने प्रेम संबंधों में सावधानी बरतने और सोशल मीडिया पर होने वाली जान-पहचान के मामले में सतर्क रहने की सलाह भी दी। इस दौरान उन्होंने दूसरे धर्म के लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने की बात कही। उनके वक्तव्य में कथित लव जिहाद का मुद्दा भी शामिल रहा।
बयान का प्रमुख हिस्सा बुर्के को लेकर की गई टिप्पणी है, जो वीडियो सामने आने के बाद चर्चा का केंद्र बना। हालांकि, किसी सार्वजनिक संबोधन के वायरल अंश को उसके पूरे संदर्भ में देखना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस बयान के संबंध में किसी आधिकारिक प्रशासनिक कार्रवाई या प्राथमिकी की पुष्टि नहीं की गई है।
जातिवाद खत्म करने और एकजुटता पर भी दिया जोर
दमोह के कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने केवल धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर ही बात नहीं की। उन्होंने हिंदू समाज से जातिवाद और आपसी भेदभाव समाप्त करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि समाज की एकता के लिए अलग-अलग वर्गों के बीच दूरी कम करना आवश्यक है। उनके संबोधन में सामाजिक समरसता, धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता और जरूरत के समय एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का संदेश प्रमुख रहा।
उन्होंने रामानंदाचार्य से जुड़ी प्रसिद्ध पंक्ति, “जात-पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई” का उल्लेख करते हुए सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठने की बात कही। उनका कहना था कि एकता का अर्थ केवल धार्मिक आयोजनों में एकत्र होना नहीं है, बल्कि संकट के समय जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आना भी है।
गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर भी रखी राय
आशीर्वचन कार्यक्रम के दौरान नवरात्रि में गरबा पंडालों में प्रवेश और लोगों की धार्मिक पहचान का मुद्दा भी उठा। रिपोर्टों के मुताबिक, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धार्मिक आयोजनों में प्रवेश करने वालों की पहचान की जांच करने और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने पंडालों में प्रवेश से पहले गौमूत्र पिलाने का सुझाव दिए जाने की बात भी रिपोर्ट की गई है।
दमोह के बाद सागर पहुंची रथयात्रा
13 अक्टूबर को दमोह में कार्यक्रम के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सागर की ओर रवाना हुए। 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उनकी सनातन हिंदू एकता रथयात्रा सागर पहुंची, जहां उन्होंने लोगों को एकजुट रहने का संदेश दिया। इस दौरान युवतियों को संबोधित करते हुए बुर्के को लेकर की गई टिप्पणी भी फिर चर्चा में आई।
सागर में उन्होंने समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को एक रहना चाहिए। युवाओं को सोशल मीडिया की रील और आकर्षण के आधार पर किसी संबंध में जल्दबाजी नहीं करने तथा किसी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने की सलाह देने की खबरें भी सामने आईं। इस तरह यात्रा के दौरान उनके संबोधन में धार्मिक पहचान, सामाजिक एकता और युवाओं को दी गई सलाह लगातार प्रमुख विषय बने हुए हैं।
जल्द दमोह में कथा और दिव्य दरबार की घोषणा
दमोह में आयोजित कार्यक्रम के अंत में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आयोजन समिति और बागेश्वर धाम शिष्य मंडल का आभार जताया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने जल्द ही दोबारा दमोह आने और यहां कथा आयोजित करने के साथ दिव्य दरबार लगाने की बात कही। हालांकि, आगामी आयोजन की तारीख और विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
फिलहाल, दमोह में दिया गया उनका बयान और सागर में जारी यात्रा के दौरान एकजुटता को लेकर की गई अपील चर्चा में है। पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए उनके संबोधन के संदर्भ, यात्रा के उद्देश्य और अलग-अलग स्थानों पर दिए गए बयानों को ध्यान में रखना जरूरी है।

मेरा नाम शैलेन्द्र है, मैंने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से बी.कॉम. किया है। बी.कॉम. (कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक करने के बाद मैंने एल.एल.बी. भी किया है। मैं देश-दुनिया और सामाजिक सरोकारों से खुद को अवगत रखता हूँ और मुझे लिखने का शौक है। मुझे अच्छे लेख लिखना अच्छा लगता है।






