कहीं महंगी गाड़ी, कहीं महंगा सामान! MP के नगरीय निकायों की खरीदी का हिसाब अब होगा
मध्य प्रदेश में खरीदी और निर्माण कार्यों से जुड़ी अनियमितताओं के 62 मामलों में कार्रवाई हुई है, जबकि अब 374 नगरीय निकायों की सरकारी खरीदी की उच्चस्तरीय जांच की घोषणा हुई है।
MP News : मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी पैसों से सामान खरीदने और निर्माण कार्य कराने में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे 62 मामलों में 146 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इनमें सात कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने, 76 की वेतनवृद्धि रोकने और 38 कर्मचारियों से आर्थिक नुकसान की रकम वसूलने के आदेश शामिल हैं। इसके अलावा 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन या महंगाई राहत में कटौती का फैसला लिया गया है। वहीं, जांच में आरोप साबित नहीं होने पर 22 कर्मचारियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
मामले को देखते हुए अब प्रदेश के सभी 374 नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही गई है। नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के मुताबिक, जांच में यह देखा जाएगा कि सामान किस प्रक्रिया से खरीदा गया, उसकी कीमत बाजार के मुकाबले कितनी थी और खरीदारी में किस अधिकारी की क्या भूमिका रही।
हालांकि, जांच की घोषणा होने का मतलब यह नहीं है कि हर मामले में गड़बड़ी साबित हो चुकी है। असल स्थिति जांच पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही साफ होगी।
62 मामलों में अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सरकारी खरीदी और निर्माण कार्यों से जुड़ी अनियमितताओं के मामलों में अलग-अलग तरह की कार्रवाई की गई है। सात कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई, जबकि 76 कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी हुए। 38 कर्मचारियों से आर्थिक नुकसान की वसूली करने का फैसला लिया गया। वहीं, 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन या महंगाई राहत में कटौती का निर्णय हुआ।
दूसरी ओर, जांच में आरोप साबित नहीं होने पर 22 कर्मचारियों को दोषमुक्त कर दिया गया। इससे साफ है कि कार्रवाई के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को दोषी नहीं माना जा सकता। हर मामले में जांच के निष्कर्ष और संबंधित आदेशों के आधार पर ही स्थिति समझी जानी चाहिए।
कोटर में वॉटर टैंकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली की खरीदी पर कार्रवाई
सतना जिले के कोटर में 3,000 लीटर क्षमता का वॉटर टैंकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली खरीदने के मामले में बाजार दर से ज्यादा भुगतान किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद उपयंत्री देवरत्न सोनी की एक वेतनवृद्धि रोकने और उनसे 1,45,215 रुपये वसूलने के आदेश दिए गए।
इस मामले में नगर निकाय को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई का फैसला लिया गया।
सरकारी खरीदी में सिर्फ सामान खरीद लेना ही काफी नहीं होता। यह भी देखना जरूरी है कि सामान की जरूरत कितनी थी, उसकी बाजार में सही कीमत क्या थी और खरीदारी नियमों के मुताबिक हुई या नहीं। इन बातों में गड़बड़ी होने पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
सिवनी और गुना में भी खरीदी को लेकर उठे सवाल
सिवनी में शौचालय और मूत्रालय से जुड़ी सामग्री, हाईमास्ट पोल और लाइटों के साथ 26 वॉट की एलईडी लाइटों की खरीदी में ज्यादा कीमत चुकाने का मामला सामने आया था। इस मामले में तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी पूजा बुनकर की दो वेतनवृद्धि रोकने और 7.16 लाख रुपये की आर्थिक क्षति वसूलने के निर्देश दिए गए। संबंधित उपयंत्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
वहीं, गुना में 20 कचरा वाहनों की खरीदी से जुड़ा मामला जांच के दायरे में आया। इस प्रकरण में 10 वाहन खरीदे जाने और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद तत्कालीन प्रभारी सीएमओ संजय श्रीवास्तव और प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी हरीशबाबू शाक्यवार की एक-एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई।
इन मामलों में विभाग ने खरीदी की मंजूरी देने से लेकर पूरी प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की।
ब्यौहारी में ज्यादा भुगतान करने पर रकम वसूलने के आदेश
शहडोल जिले के ब्यौहारी में नलकूप खुदाई और सामग्री की खरीदी के दौरान बाजार दर से अधिक भुगतान किए जाने का मामला भी सामने आया। इस प्रकरण में महेंद्र मिश्रा से 1.18 लाख रुपये वसूलने और उनकी दो वेतनवृद्धि रोकने के आदेश दिए गए। यशवंत वर्मा की भी दो वेतनवृद्धि रोकने का फैसला लिया गया।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे मामले प्रदेश के कई संभागों में सामने आए हैं। ग्वालियर संभाग में 32, शहडोल में 25, उज्जैन में 21, इंदौर में 21, भोपाल में 16 और जबलपुर में 15 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए। इसके अलावा दूसरे संभागों के नगरीय निकायों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
तीन साल में 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी, 250 करोड़ की बचत का अनुमान
सरकारी खरीदी में कीमतों का अंतर भी जांच का अहम मुद्दा है। विभागीय प्रस्तुति के मुताबिक, मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने तीन साल में सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल के जरिए करीब 1,134 करोड़ रुपये का सामान खरीदा।
विभाग के विश्लेषण में अनुमान लगाया गया कि अगर यह सामान औसत कीमतों पर खरीदा जाता, तो करीब 250 करोड़ रुपये की बचत हो सकती थी।
हालांकि, 250 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा संभावित बचत का अनुमान है। इसे सीधे तौर पर सरकारी खजाने को हुआ नुकसान या घोटाले की रकम नहीं माना जा सकता। किसी सामान की कीमत उसकी गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, आपूर्ति की शर्तों और दूसरे खर्चों पर भी निर्भर करती है।
इसलिए यह पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है कि किन मामलों में कीमत का अंतर सही कारणों से था और कहां नियमों के खिलाफ खरीदारी करके सरकारी धन को नुकसान पहुंचाया गया।
सभी 374 नगरीय निकायों की खरीदी की होगी जांच
नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने सरकारी खरीदी से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है। इसके तहत GeM पोर्टल पर हुई खरीदारी, सामान की कीमतों में अंतर, खरीद प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच में जिसकी जिम्मेदारी सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब सबकी नजर इस जांच पर रहेगी कि प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी के दौरान कहां नियमों का पालन हुआ और किन मामलों में गड़बड़ी सामने आती है। जांच पूरी होने और अंतिम निष्कर्ष जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कितने मामलों में अनियमितताएं साबित होती हैं और जिम्मेदार लोगों पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

नरसिंहपुर जिले की पत्रकारिता में अपनी एक अलग छवि रखने वाले खबरों को नए तरीके के साथ तीखे अंदाज में लिखने का हुनर बहुत अच्छे से जानते हैं . अब जनसंपर्क टाइम के लिए भी खबरें लिखेंगे






