एमपी पुलिस में तीसरा मामला: महिला आरक्षक को जेंडर चेंज कराकर अब बनेगा मर्द गृह विभाग ने दी जेंडर चेंज की इजाजत
जनवरी 2022 में आवेदन के बाद गांधी मेडिकल कॉलेज में जांच और जिला मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर मिली मंजूरी; पुलिस मुख्यालय अब आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।
Madhya Pradesh Police news : मध्य प्रदेश पुलिस में पदस्थ एक आरक्षक को पुरुष के रूप में जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए राज्य के गृह विभाग से अनुमति मिल गई है। लंबे समय से लंबित इस आवेदन पर फैसला चिकित्सा जांच, मेडिकल बोर्ड की सिफारिश और प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की समीक्षा के बाद लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद गृह विभाग ने अनुमति संबंधी आदेश जारी किए। अब पुलिस मुख्यालय निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस में इससे पहले भी दो महिला आरक्षकों को जेंडर ट्रांजिशन की अनुमति मिल चुकी है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2021 में निवाड़ी और वर्ष 2023 में रतलाम जिले से ऐसे मामले सामने आए थे। मौजूदा मामले में अनुमति मिलना प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित आरक्षक की मेडिकल प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
जनवरी 2022 में दिया था आवेदन
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संबंधित आरक्षक ने जनवरी 2022 में जेंडर ट्रांजिशन की अनुमति के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ शपथ पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए गए थे। इसके बाद मामले की चिकित्सकीय जांच और प्रशासनिक औपचारिकताओं की प्रक्रिया शुरू हुई।
जुलाई 2022 में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में उनकी मेडिकल जांच कराई गई थी। जांच के बाद मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद जिला मेडिकल बोर्ड ने भी मामले की समीक्षा करते हुए जेंडर ट्रांजिशन के पक्ष में अनुशंसा की।
चिकित्सकीय रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के बाद मामला पुलिस मुख्यालय के माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंचा। पुलिस मुख्यालय ने अपनी अनुशंसा शासन को भेजी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गृह विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। विभाग ने दस्तावेजों और चिकित्सकीय अभिमतों का परीक्षण करने के बाद अनुमति संबंधी आदेश जारी किए।
पहले निवाड़ी और रतलाम में भी आए थे मामले
मध्य प्रदेश पुलिस में जेंडर ट्रांजिशन की अनुमति से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2021 में निवाड़ी जिले में पदस्थ एक महिला आरक्षक को अनुमति दी गई थी। इसके बाद अगस्त 2023 में रतलाम जिले में पदस्थ एक अन्य महिला आरक्षक को भी राज्य सरकार से मंजूरी मिली थी। इस तरह मौजूदा मामला प्रदेश पुलिस में जेंडर ट्रांजिशन की अनुमति का तीसरा रिपोर्ट किया गया प्रकरण है।
इन मामलों में सरकारी अनुमति और चिकित्सकीय प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है। गृह विभाग की मंजूरी के बाद संबंधित कर्मचारी को डॉक्टरों की सलाह और लागू नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। मौजूदा आरक्षक की मेडिकल प्रक्रिया कब पूरी होगी, इसकी निश्चित तारीख उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं बताई गई है।
छह अन्य आरक्षकों के आवेदन भी चर्चा में
17 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश पुलिस में छह अन्य महिला आरक्षकों ने भी पुरुष के रूप में जेंडर ट्रांजिशन की अनुमति के लिए आवेदन किया है। रिपोर्ट में तीन आवेदनों को मंजूरी की प्रक्रिया के करीब और तीन को विचाराधीन बताया गया है। इन आवेदनों पर अंतिम निर्णय होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
नए आवेदनों की जानकारी से स्पष्ट होता है कि पुलिस विभाग में ऐसे मामलों के लिए दस्तावेजों, चिकित्सकीय जांच और प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है। संबंधित आरक्षक के वर्तमान मामले में गृह विभाग का आदेश जारी होने के बाद अब आगे की कार्रवाई पुलिस मुख्यालय और संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत करनी है।

मेरा नाम शैलेन्द्र है, मैंने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से बी.कॉम. किया है। बी.कॉम. (कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक करने के बाद मैंने एल.एल.बी. भी किया है। मैं देश-दुनिया और सामाजिक सरोकारों से खुद को अवगत रखता हूँ और मुझे लिखने का शौक है। मुझे अच्छे लेख लिखना अच्छा लगता है।






