अब MP के बड़े जलाशयों में होगी मछलियों की बंपर पैदावार, हजारों लोगों को मिल सकता है काम
बाणसागर, बरगी, बारना और इंदिरा सागर में आधुनिक केज कल्चर से मछली उत्पादन बढ़ाने की योजना, साथ ही प्रोसेसिंग और निर्यात को भी मिलेगा बढ़ावा।
भोपाल: मध्यप्रदेश में मछली पालन को बड़े व्यावसायिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। राज्य के बड़े जलाशयों का इस्तेमाल अब आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसके लिए इंदौर की कामदार्स केयर और कुवैत की जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी के बीच करीब 7,430 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश का समझौता हुआ है। इस परियोजना के तहत चार प्रमुख जलाशयों में मछली पालन से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ मछुआरों और मछली पालकों के लिए कमाई के नए अवसर तैयार करना तथा मध्यप्रदेश के मत्स्य उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है।
यह समझौता जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में किया गया था। इसके तहत बाणसागर, बरगी, बारना और इंदिरा सागर जलाशयों में आधुनिक केज कल्चर और इससे जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है। समझौते में करीब चार लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य बताया गया है। यह प्रस्तावित लक्ष्य है, वास्तविक उत्पादन परियोजना के क्रियान्वयन और उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगा।
चार जलाशयों में मछली उत्पादन
इस परियोजना में केज कल्चर यानी जाल के पिंजरों में मछलियां पालने की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें जलाशय के भीतर विशेष जाल लगाए जाते हैं, जिनमें मछलियों को नियंत्रित परिस्थितियों में पाला जाता है। पानी की गुणवत्ता, मछलियों के भोजन और देखभाल का ध्यान रखते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। इससे जलाशयों के उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, बड़े स्तर पर मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए केवल जाल लगाने से काम नहीं चलेगा। मछलियों के स्वास्थ्य, पानी की गुणवत्ता, उचित आहार, रोग नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। इसके साथ ही स्थानीय मछुआरों की आजीविका और जलाशयों के मौजूदा उपयोग को ध्यान में रखकर परियोजना को आगे बढ़ाना होगा।
मछली के साथ सब्जियों के उत्पादन की भी योजना
इस परियोजना में केवल मछली पालन ही नहीं, बल्कि सब्जियों के उत्पादन को बढ़ाने की योजना भी शामिल है। इसके लिए एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीनहाउस जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, इन माध्यमों से करीब 1.23 लाख मीट्रिक टन सब्जियों के उत्पादन का लक्ष्य बताया गया है। इससे कृषि और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़कर उत्पादन के नए विकल्प तैयार करने की संभावना है।
समझौते में मछलियों के उत्पादन से लेकर बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर है। इसमें प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़ी सुविधाओं की अहम भूमिका होगी। यदि इन व्यवस्थाओं को समय पर विकसित किया जाता है, तो मछली पालकों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार खोजने में मदद मिल सकती है।
35 हजार रोजगार के अवसर बनने का अनुमान
परियोजना से रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद जताई गई है। उपलब्ध विस्तृत परियोजना विवरण के मुताबिक, लगभग 15 हजार प्रत्यक्ष और 20 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है। इस तरह कुल संभावित रोजगार करीब 35 हजार बताया गया है। इन अवसरों में मछली पालन, परिवहन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और बिक्री से जुड़े काम शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह अनुमान है और वास्तविक रोजगार परियोजना के विस्तार तथा स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
स्थानीय मछुआरों, युवाओं और छोटे कारोबारियों के लिए इस क्षेत्र में नए अवसर तभी ज्यादा उपयोगी साबित होंगे, जब उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, बाजार की जानकारी और वित्तीय संसाधनों तक उचित पहुंच मिलेगी। इसके अलावा छोटे मछली पालकों को बड़े निवेश वाली परियोजनाओं से जोड़ना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि विकास का लाभ केवल बड़े कारोबार तक सीमित न रहे।
निर्यात बढ़ाने की तैयारी, आज भोपाल में मत्स्य निवेश सम्मेलन
मध्यप्रदेश सरकार मछली उत्पादन को घरेलू बाजार तक सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। परियोजना से जुड़े विवरण में प्रदेश से करीब 6,000 करोड़ रुपये के मत्स्य निर्यात का लक्ष्य भी बताया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण, शीत भंडारण, पैकेजिंग, परिवहन और निर्यात मानकों के अनुरूप सुविधाओं का विकास अहम होगा।
इसी दिशा में 23 अक्टूबर 2026 को भोपाल में फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। इसमें निवेशकों, निर्यातकों, मछली पालकों, सहकारी समितियों और अन्य संबंधित पक्षों के शामिल होने की योजना है। सम्मेलन का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन को निवेश, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। इसमें मध्यप्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका-2026 जारी करने, एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का वर्चुअल उद्घाटन करने और जलाशयों के विकास से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की भी योजना घोषित की गई है।
केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश को जलाशय मत्स्यपालन क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया है। इस क्लस्टर में हलाली जलाशय और खंडवा जिले का इंदिरा सागर जलाशय शामिल हैं। यह पहल चार जलाशयों वाली निवेश परियोजना से अलग है, लेकिन राज्य में मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों से जुड़ी है।
केंद्र के वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में कुल मछली उत्पादन करीब 4.45 लाख मीट्रिक टन था। ऐसे में प्रस्तावित चार लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य राज्य के मौजूदा उत्पादन के मुकाबले बड़ा है। इसे हासिल करने के लिए चरणबद्ध विकास, तकनीकी विशेषज्ञता, बाजार की मांग और जलाशयों के टिकाऊ इस्तेमाल पर विशेष ध्यान देना होगा।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन को बड़े कारोबार और निर्यात से जोड़ने की योजना से नए अवसर बनने की संभावना है। लेकिन परियोजना की असली सफलता इस बात से तय होगी कि निवेश और बुनियादी ढांचे का विकास कितनी प्रभावी तरीके से होता है, पर्यावरणीय संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है और स्थानीय मछुआरों को इससे कितना व्यावहारिक लाभ मिलता है।

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